संदेश

मार्च, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या हुआ

चुनावी मोसम आ गया है और टीवी पर नए नए तेवर लेकर सारे दलोंके प्रवक्ता बाइट देते फ़िर रहे है। प्रकाश जावडेकर, रविशंकर प्रसाद और अभिषेक मनु संघवी कपिल सिब्बल। यदि दोनों दलों मे तुलना करे तो मुझे कांग्रेस के प्रवक्ता ज्यादा शार्प लगे। बीजेपी के प्रवक्ता मुझे लीपा पोती करते ज्यादा लगते है और मुद्दों का खोखलापण उभर कर सामने आ जाता है। इसके विरुद्ध अभिषेक और कपिल ज्यादा आक्रामक है। वो बीजेपी के प्रवक्ताओं को बगले झाकने पर मजबूर कर देते है वैसे ये पहले ऐसे चुनाव है जहा मुद्दे गायब है और मनमोहन साहब का कथन सही हो सकता है की आडवाणी जी का प्रधानमंत्री बनने का सपना चूर चूर होने वाला है। खैर प्रधानमत्री ज्यादा संयमित है और उन्होंने संयम के साथ ही आडवाणी जी को लाल कर दिया और वो बहस की चुनोती देने लगे । पर आडवाणी जी भारत मे इन सब पचादो मे कोन पड़ता है। लोग तो बस ऐसे ही वोट दे देते है और वोट नही देने वाले ज्यादा राजनीती को कोसते है। ५ साल बाद कोन कहा होगा पता नही। लालू ने उत्तेजना मे आकर कह दिया की आडवाणी अगर प्रधानमत्री बन गए तो वो चुनाव नही लडेंगे । लालूजी बडबोलापन ठीक नही है देखा नही दिग्गीराजा प्र...

भस्मासुर

चित्र
बचपन मे मेरी दादी मुझे कहानी सुनाया करती थी भस्मासुर की। किस तरह भस्मासुर ने तपस्या कर भगवन शंकर को प्रसन्न किया और वरदान माँगा की वो जिसके सर पर हाथ रख दे वह भस्म हो जाए। तथास्तु............और भस्मासुर एक्टिव हो गया। भस्मासुर अत्यन्त प्रसन्न और धीरे धीरे सब कुछ भस्म करता हुआ अपने रचयिता को ही भस्म करने को उद्यत हो गया। तब रचयिता भागते फायर और तीसरी ताकत की मदद से भस्मासुर को स्वयं अपने ही हाथो भस्म करवाने मे सफल रहे। लगभग यही कहानी आज के वक्त पकिस्तान, अफगानिस्तान, अमेरिका, भारत और श्रीलंका मे जारी है। पहले तो आतंकवादी पैदा कर उनके हाथो अस्त्र शास्त्र दे दिए गए अब वे उन्ही से बचाव का रास्ता धुंद रहे है। लाहौर मे हमला, क्रिकेट पर हमला, पुलिस पर हमला, कश्मीर मे हमले, अफगानिस्तान मे रोजाना हत्याए.........ये सब क्या है। पुराकाल मे राक्षस होते थे आजकल आतंकी है। हुकूमते लाचार है। अमेरिका की अधि शक्ति इनको सँभालने मे जाया हो रही है। पालनहार स्वयं परेशां है की अपने पित्ठुओ से अपने को कैसे बचाए। पाकिस्तान आतंकियों का नखलिस्तान हो गया है। मेरा ३ वर्षीय बेटा जो मीठा खाने का शोकिन है । जब वह ज्या...

चाँद के बहाने

रंजिश ही सही दिल के दुखाने के लिए आ आ मुझे फ़िर से छोड़ के जाने के लिए आ। वाह मेहदी साहब क्या बात कही है आपने। जब जब मेरे सामने चंद्फिजा (नही समझे चाँद फिजा यार ) पुरे भारत को चिंता है की चाँद का गुप्त रोग ठीक हो जाए तो फिजा रंगीन हो जाए (कम से कम प्राइम टाइम पर यही लगता है - यकीं नही होता तो श्रीमान रजत शर्मा का बुद्धिजीवी चैनल खोल लिया करो यार , पुरे एक घंटे me आपको ४ चुटकुले २ डांस ३ क्रिक्केट ५ शाहरुख़ की खबरे और ५ चड्डी के विज्ञापन देखने को मिल जायेंगे और हां एक-अध् न्यूज़ भी मिल जायेगी। रतको आपको डराने के बाद कोई खूखार बाबा आपका भविष्य भी बताएगा )। यार मई भी कहा कहा भटक जाता हु - मई तो चाँद के बहाने फिजा की चिंता कर रहा था । अब बेचारी क्या करेगी तभी 6 टी इन्द्री ने कहा अब फिजा फ़िल्म मे आएगी । फ़िल्म मे वो क्या करेगी यार उसके लिए हीरो कोन होगा ? जवाब भी हाजिर है हीरो के लिए अ क हंगल से बात चल रही है पर वो कहते है की यार हेरोइन (अभिनेत्री यार - तुम भी ग़लत मतलब निकाल लेते हो ) जीरो साइज़ की चाहिए। कोई एड एजेन्सी wala कह रहा था की अगर वो चाहे तो काले दंत manjan के एड का भी स्कोपे है...

वरुण गाँधी

हा तो यह तो होना ही था । जो छटपटाहट उनमे हो रही थी उसी का नतीजा है पीलीभीत मे उनका भाषण। हम अक्सर देखते आ रहे है की कोई तो बहुत मान पाताहै और कोई हाशिये पर ही रह जाता है। रामायण देखे तो तो पाएंगे की राम और लक्ष्मन का तो जिक्र हर जगह है पर शत्रुघ्न का बिल्कुल ही नही है । जो मान महाभारत मे युधिष्ठिर भीम और अर्जुन का है वो नकुल और सहदेव का नही है । कहने का मतलब यह है की वो हाशिये पर ही रहे। या तो दुर्योधन या दुशासन छाये रेह पर बाकि ९८ कोन है १०० मे से १०० भारतीय नही बता सकते (ऐसा मेरा मानना है )। ठीक इसी तरह राहुल और वरुण मे भी हाशिये की लडाई है। वरुण अच्छी तरह जानते है की वो कांग्रेस मे रहे तो हाशिये पर ही रहेंगे इसलिए उन्होंने बीजेपी चुनी । वो समाजवादी या रजद या बीएसपी भी चुन सकते थे लेकिन वो जानते है की इनकी अपील सिमित है । कल तक जो लोग वरुण को नही जानते थे वो भी जानने लगे है । ऐसा नही है की बीजेपी मे वरुण बहुत ऊपर तक जायेंगे लेकिन बीजेपी मे रहकर कम से कम वो हाशिये पर नही रहेंगे। वो ये भी जानते है की वो प्रधानमंत्री भी नही बन सकते क्योकि बीजेपी वाले ऐसा होने नही देंगे , कांग्रेस मे तो...

आओ जी

चित्र
हा तो मई कह रहा था की टीवी बकवास है पर मुझे कई कमेंट्स मिले है जिनमे सुझाया गया है की आप दूरदर्शन देखे या इंडिया टीवी तो बिल्कुल ही न देखे । अब जब टाटा स्काई लगवाया है तो हर महीने २५० रुपये ढीले करने ही है चाहे इसको देखो या नही देखो। कई बार ऐसा होता है की मे कई दिनों तक टूर पर होता हु और टीवी बंद ही रहता है फ़िर भी मुझे पैसा तो देना ही होता है । एक बात और है की हम जो चैनल देखना चाहता है वही हमें देखने को मिले अन्य चैनल जो हम नही चाहते वो न मिले। कई चैनल पैकेज मे ऐसे है जो मेरे किसी काम के नही है जैसे सन टीवी या सूर्य टीवी क्योकि मई तमिल या तेलुगु नही जानता। तब उन चैनल्स का भी पैसा मुझे देना होता है । तब एक मुद्दा उभर कर सामने आता है की अगर हम टीवी नही देख रहे है तो फ़िर भी पैसे क्यो दे रहे है । यह भी एक प्रीपेड सर्विस है सो जितना देखो उतना पैसा कटे । हा वलिदिटी वौचेर्स जरुर बनाए जा सकते है। इससे उपभोक्ताओ की जेब भी नही कटेगी और वो जितना चाहे उतना उपभोग करे .

पता नही

मैं रोज टीवी खोलता हु और रिमोट हाथ मे लेकर इत्मिनान से बैठना चाहता हु । पर आप विश्वास नही करेंगे की आधे घनटे मे पुरे ६५ चैनल बदलने के बाद थक हार कर टीवी बंद कर देता हु'। सिर्फ़ निराशा ही हाथ लगती है। पिछले दिनों इंडिया टीवी सामने आया और उसमे समाचारों के नाम पर दिखा रहे थे की सहवाग क्यो बैटिंग के दोरान आखे बंद करके बुदबुदाता है। क्या ये कोई मंत्र है ? तरह तरह के कयास लगाये जा रहे थे। ऊपर लाइन चल रही थी सहवाग का तदाताड़ मारक मात्र। पीछे से ॐ ॐ की आवाजे आ रही थी। पुरा माहोल बना हुआ था। एंकर आपस मे दिस्कुस्स कर रहे थे की सहवाग को कोई सिद्धि प्राप्त है क्या? शायद ये सिद्धि नेव्ज़ेअलन्द जाने के बाद प्राप्त हुई है। क्या ये वर्ल्ड कप तक चलेगी? मैंने अपना सर पकड़ लिया और टीवी बंद कर दिया । कुछ और देखने की इच्छा ही नही रही। हसी भी आ रही थी और क्षोभ भी हो रहा था। मैं सोच रहा था की ये क्या है? क्या ये कोई समाचार है, ज्योतिष है, विज्ञानं है, शास्त्र है, क्या है ये? इस बात को कई दिन गुजर गए पर मेरे आज तक समझ नही आया है। अगर आपको समझ aaye तो बताइए