घी का मायाजाल
मुनाफा कमाने के लिए लोग इस हद तक गिर जाते है कि वे दूसरों की जिंदगी ही दांव पर लगा देते है। ऐसे लोगों को केवल पैसों की भूख होती है। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले ऐसे लोगों को फांसी की सजा मुकर्रर होनी चाहिए। यह कहना है घी बनाने वाली एक फैक्टरी में काम करने वाले युवक का। पंचकूला निवासी इस युवक को जब घी की असलियत पता लगी तो उसने फैक्टरी ही छोड़ दी। यह युवक घी की सुगंध से ही बता देता है कि यह असली है या नकली। युवक का दावा है कि पंचकूला में भी कई जगहों पर नकली घी बिक रहा है। कैसे तैयार होता है नकली घी देशी घी के नाम पर जो नकली घी बाजार में उपलब्ध है, उसमें हड्िडयों का बुरादा मिला होता है। मिली जानकारी के अनुसार शुद्ध घी में हड्डी की चर्बी लगभग बराबर अनुपात में मिलाई जाती है, जिससे वह दानेदार प्रतीत होता है। हड्डी की बदबू खत्म करने के लिए इसमें केमिकल एसेंस डाला जाता है। हड्डी का जो बुरादा डाला जाता है, उसे टेलो कहते है। इसीलिए इस घी के निर्माताओं ने इसे कोड वर्ड 'टेलो घी' का नाम दे रखा है। खास बात यह है कि आम आदमी को इस घी के नकली होने का जरा सा इल्म नहीं हो सकता। टेलो को साबुन ...