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घी का मायाजाल

मुनाफा कमाने के लिए लोग इस हद तक गिर जाते है कि वे दूसरों की जिंदगी ही दांव पर लगा देते है। ऐसे लोगों को केवल पैसों की भूख होती है। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले ऐसे लोगों को फांसी की सजा मुकर्रर होनी चाहिए। यह कहना है घी बनाने वाली एक फैक्टरी में काम करने वाले युवक का। पंचकूला निवासी इस युवक को जब घी की असलियत पता लगी तो उसने फैक्टरी ही छोड़ दी। यह युवक घी की सुगंध से ही बता देता है कि यह असली है या नकली। युवक का दावा है कि पंचकूला में भी कई जगहों पर नकली घी बिक रहा है। कैसे तैयार होता है नकली घी देशी घी के नाम पर जो नकली घी बाजार में उपलब्ध है, उसमें हड्िडयों का बुरादा मिला होता है। मिली जानकारी के अनुसार शुद्ध घी में हड्डी की चर्बी लगभग बराबर अनुपात में मिलाई जाती है, जिससे वह दानेदार प्रतीत होता है। हड्डी की बदबू खत्म करने के लिए इसमें केमिकल एसेंस डाला जाता है। हड्डी का जो बुरादा डाला जाता है, उसे टेलो कहते है। इसीलिए इस घी के निर्माताओं ने इसे कोड वर्ड 'टेलो घी' का नाम दे रखा है। खास बात यह है कि आम आदमी को इस घी के नकली होने का जरा सा इल्म नहीं हो सकता। टेलो को साबुन ...

दरिन्दे

परसों की ख़बर है की पकिस्तान के पशिमोत्तर प्रान्त मे बुनेर मे एक फूटबालबम से १२ बच्चो की मौत हो गई। एक खेल मैदान मे बच्चो को लावारिस फूटबाल मिली और वो उससे खेलने लगे तभी विस्फोट हुआ और १२ बच्चो की मौत हुई। इस ख़बर को ज्यादा तवज्जो नही मिली क्योकि पकिस्तान मे ऐसे धमाके रोजाना ही होते है और लोग मरते ही रहते है। पर यह ख़बर बहुत ख़ास है। अब तक आतंकवादी बडो को मारते थे, किसी घटना मे अगर बच्चे भी मर जाए तो यह संयोग ही रहता था पर यह घटना यह सिद्ध करती है की अब उनके निशाने पर बच्चे भी है और इन दरिंदो मे मानवता नाम की कोई चीज नही है । तालिबान शुरू से कहते रहे है की खेलो और फिल्मो की या मनोरंजन की इस्लाम मे कोई जगह नही है। आप तो बस दाढ़ी बढाओ और हाथ मे हथ्यार थामो और लोगो को मौत के घाट उतारो। इस घटना ने लोगो को या बच्चो को चेतावनी दी है की अगर खेले तो मौत आ सकती है। तुम खेलो मत पढ़ाई मत करो बस जेहादी बनो। इस घटना का कही कोई प्रतिक्रिया नही आई और सब चुप है पर यह अत्यन्त भयानक और घिनोनी घटना है। पकिस्तान को कार्यवाही करनी छाहिये और अमेरिका क्यो चुप है समझ नही आता। जब तक इन दरिंदो को धर्म के नाम पर...

जूता पुराण

मेरे अपने पहले ब्लॉग जरनैल का जूता मे जरनैल सिंह के जूता फेकने को सही ठहराया था और मई उस पर अभी भी कायम हु। मैंने जो कहा था वह सच हुआ और कांग्रेस ने सज्जन और जगदीश के टिकेट भी काटे परन्तु अब तो जुटा फेकने की बयार आई हुई है। जिसे देखो वही जूता फेक रहा है। जीतेन्द्र, आडवानी, नविन जिंदल और अब प्रधानमन्त्री पात्र जूता फेका जा चुका है। जरनैल के जूता फेकने और बाकि जूता फेकने मे अन्तर है। जरनैल के पास मुद्दा था लेकिन बाकि सिर्फ़ सुर्खिया बटोरने के लिए ये सब कर रहे है। प्रधानमत्री पर जूता फेकना असभ्यता की पराकाष्ठा है। इन लोगो को माफ़ करना इनके होसले बढ़ाने जैसा ही है। प्रधानमंत्री का पद बहुत ही गंभीर और जिमेदार पदहै, इस पड़ पर आसीन व्यक्ति बहुत ही सम्माननीय होते है उनपर जूता फेकना बहुत ही ग़लत और कायराना हरकत है। अब सरकार को सभी जूते फेकने वालो पर कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि संदेश मिले की झूटे प्रचार पाने का यह तरीका कितना ग़लत है।

द ग्रेट इंडियन पॉलिटिकल मुजरा

चुनाव के पहले दौर के मतदान ख़त्म हो चुका है और दूसरा होने वाला है पर कही भी कोई सुगबुगाहट नजर नही आ रही है । टीवी पर जरुर बुलबुले छूटते रहते है पर वो अपर्याप्त है। कही कोई बहस कोई नुक्कड़ बैठक कुछ नही है। रैली हो रही है पर बहुत सिमित है। वह दौर चला गया लगता है जब प्रत्याशी घर घर जाकर दस्तक देते थे और हाथ जोड़ते फिरते थे । नुक्कड़ नुक्कड़ सभाए होती थी और चोराहे पान ठेले आपसी बहसों से गुलजार होते थे। बच्चे पार्टियों के बिल्ले इकट्ठे करते फिरते थे। अबकी बरी अटल बिहारी या फ़िर चार चवन्नी थाली मे इंदिरा गाँधी दिल्ली मे। अब तो नारे मजमे गायब है। चुनाव आयोग ने ऐसा चाबुक मारा है की सब कुछ सहम गया है। और तो और अब प्रत्याशी भी नजर नही आते है। अब तो प्रत्याशी ज्यादा ही समझदार हो गए है, चुनाव के दोरान ही घरो पर दस्तक नही देते तो जितने के बाद क्या आयेंगे? खैर उन्हें आने की आवशयकता ही क्या है जाए तो भी वोट पड़ेंगे चाहे कम ही पड़े। भारतीय लोकतंत्र मे अगर ३ वोट भी पड़े तो दो वोट पाने वाला विजयी होगा चाहे उस क्षेत्र की जनसँख्या १० लाख ही क्यो न हो। हां तो मई कह रहा था की आजकल नेता गायब है और झंडे डंडे इति...

जरनैल का जूता

इतिहास गवाह है जब जब जुल्म की इन्तहा होती है तो दबा हुआ गुस्सा बाहर फ़ुट आता है ऐसा ही कुछ दिल्ली मे हुआ जब बहादुर पत्रकार जरनैल सिंह ने चिदंबरम पर जुटा उछाल फेका । यहाँ जो जूता ताई टलर पर पड़ना था उसे सांकेतिक रूप से गृहमंत्री पर मारा गया । यह हमला देश के maanas पर भी है जिसने कम से कम soye हुए लोगो को jhinjhoda तो सही । यह कोई हमला नही आक्रोश की अभिव्यक्ति था । ८४ के दंगो के शिकार अब तक न्याय को तरस रहे है और दंगाई सजा पाने के बजाय मत्री बन रहे है । ये कैसा न्याय है । राजीव गाँधी ने कहा था की जब बड़ा पेड़ गिरता है तो निचे वाले दबेंगे ही ( यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है की राजीव ने यह बात गुजरात के २० वर्ष पहले कही थी , यानि की हम कह सकते है की मोदी परम्पराओ का पालन कर रहे थे ?) BJP ने moka lapak लिया और sikho ने जरनैल को moral support दिया । अब घटना की शव parikshaa हो रही है और हो सकता है congress जरनैल के ...

पद्मश्री

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बॉलीवुड मे मशहूर है की जो अवार्ड दिए जाते है वो सपोंसर्ड होते है यानि की अगर मेरा सिक्का चलता हो तो कांती शाह टाइप फ़िल्म को भी सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का अवार्ड मिल सकता है। अब सरकार भी सरकारी उच्चसम्मानों का मजाक बनाने पर उतर आई है। इस वर्ष दो बड़ी ही सम्मान निय हस्तियों को पद्म अवार्ड दिए है जिन्होंने भारत का सम्मान बढाने के बड़े ही उचे उचे काम किए है. एक हस्ती है श्रीमती ऐश्वर्या रायबच्चन जिन्होंने भारत की अगली मदर टेरेसा बनने के वादे करने के बाद फिल्मो मे काफी कमर मटकाई। देश को नचाने का कामकिया। ये किससे शादी करेगी और किसका दिल तोडेगी इस विषय पर अखबारों पत्रिकाओ के टनों पन्ने काले हुए और प्राइम टाइम पर देश की जनता काबहुत समय जाया हुआ। इन्होने बहुत सी लड़कियों की जिंदगी सपने दिखाने मे बर्बाद की और कई कंपनियों की बिक्री बढाई। कभी कहती ये साबुन आपकी त्वचा को चम्कायेगा कभी कहती ये क्रीम लगाओ जिंदगी बदल जायेगी । पर न तो त्वचा निखरी न जिंदगी बदली, लड़कियों को काम्प्लेक्स जरुर दे दिया। दुसरे महान पद्म श्री है श्रीमंत अक्षय कुमार जो फूहड़ फिल्मो मे काम करते करते पद्मश्री हो गए।...

चुनाव आचार संहिता - चू चू का मुरब्बा

चुनावी मोसम आ आया और चुनावी मेंढक आपने अपने बिलों से बहार आ गए। कल तक जो नेता सूरत दिखाने ५ सालो मे आते थे अब वो इस चुनावी बहार मे गुलजार हो रहे है। जहा देखो ये ही नजर आ रहे है। पहले तो चुनाव आयोग क्या होता है ये लोग नही जानते थे परन्तु श्रीमान शेषन के पदार्पण के बाद सभी जानने लगे है। उनकी लीक पीटने का काम उनके बाद के चुनाव आयुक्त कर रहे है। परन्तु ये चुनाव अचार संहिता अब लगने लगा है की चुचू का मुरब्बा बन कर रह गई है। जहा देखो यही शोर है की फलाने जी को आदर्श चुनाव संहिता या अचार संहिता का उल्लंघन करने पर नोटिस दिया या आपत्ति जताई परन्तु होता कुछ नही । इस बार यह देखने मे आ रहा है की बीजेपी के नेताओ पर ज्यादा अचार संहिता के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे है। इससे दो निष्कर्ष निकलते है या तो वास्तव मे बीजेपी के लोग कानून नही मानते या उन्हें जबरदस्ती बलि का बकरा बनाया जा रहा है। दुसरे मामलो का तो नही कह सकता पर जसवंत सिंह वाले मामले मे लगता है की अचार संहिता चुचू का मुरब्बा हो रही है। बड़ा रोचक मामला है जसवंत सिंह को ढोल वाले को पैसे देने के आरोप मे नोटिस। इस मामले की जांच चुनाव आयोग के आदेश...

क्या हुआ

चुनावी मोसम आ गया है और टीवी पर नए नए तेवर लेकर सारे दलोंके प्रवक्ता बाइट देते फ़िर रहे है। प्रकाश जावडेकर, रविशंकर प्रसाद और अभिषेक मनु संघवी कपिल सिब्बल। यदि दोनों दलों मे तुलना करे तो मुझे कांग्रेस के प्रवक्ता ज्यादा शार्प लगे। बीजेपी के प्रवक्ता मुझे लीपा पोती करते ज्यादा लगते है और मुद्दों का खोखलापण उभर कर सामने आ जाता है। इसके विरुद्ध अभिषेक और कपिल ज्यादा आक्रामक है। वो बीजेपी के प्रवक्ताओं को बगले झाकने पर मजबूर कर देते है वैसे ये पहले ऐसे चुनाव है जहा मुद्दे गायब है और मनमोहन साहब का कथन सही हो सकता है की आडवाणी जी का प्रधानमंत्री बनने का सपना चूर चूर होने वाला है। खैर प्रधानमत्री ज्यादा संयमित है और उन्होंने संयम के साथ ही आडवाणी जी को लाल कर दिया और वो बहस की चुनोती देने लगे । पर आडवाणी जी भारत मे इन सब पचादो मे कोन पड़ता है। लोग तो बस ऐसे ही वोट दे देते है और वोट नही देने वाले ज्यादा राजनीती को कोसते है। ५ साल बाद कोन कहा होगा पता नही। लालू ने उत्तेजना मे आकर कह दिया की आडवाणी अगर प्रधानमत्री बन गए तो वो चुनाव नही लडेंगे । लालूजी बडबोलापन ठीक नही है देखा नही दिग्गीराजा प्र...

भस्मासुर

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बचपन मे मेरी दादी मुझे कहानी सुनाया करती थी भस्मासुर की। किस तरह भस्मासुर ने तपस्या कर भगवन शंकर को प्रसन्न किया और वरदान माँगा की वो जिसके सर पर हाथ रख दे वह भस्म हो जाए। तथास्तु............और भस्मासुर एक्टिव हो गया। भस्मासुर अत्यन्त प्रसन्न और धीरे धीरे सब कुछ भस्म करता हुआ अपने रचयिता को ही भस्म करने को उद्यत हो गया। तब रचयिता भागते फायर और तीसरी ताकत की मदद से भस्मासुर को स्वयं अपने ही हाथो भस्म करवाने मे सफल रहे। लगभग यही कहानी आज के वक्त पकिस्तान, अफगानिस्तान, अमेरिका, भारत और श्रीलंका मे जारी है। पहले तो आतंकवादी पैदा कर उनके हाथो अस्त्र शास्त्र दे दिए गए अब वे उन्ही से बचाव का रास्ता धुंद रहे है। लाहौर मे हमला, क्रिकेट पर हमला, पुलिस पर हमला, कश्मीर मे हमले, अफगानिस्तान मे रोजाना हत्याए.........ये सब क्या है। पुराकाल मे राक्षस होते थे आजकल आतंकी है। हुकूमते लाचार है। अमेरिका की अधि शक्ति इनको सँभालने मे जाया हो रही है। पालनहार स्वयं परेशां है की अपने पित्ठुओ से अपने को कैसे बचाए। पाकिस्तान आतंकियों का नखलिस्तान हो गया है। मेरा ३ वर्षीय बेटा जो मीठा खाने का शोकिन है । जब वह ज्या...

चाँद के बहाने

रंजिश ही सही दिल के दुखाने के लिए आ आ मुझे फ़िर से छोड़ के जाने के लिए आ। वाह मेहदी साहब क्या बात कही है आपने। जब जब मेरे सामने चंद्फिजा (नही समझे चाँद फिजा यार ) पुरे भारत को चिंता है की चाँद का गुप्त रोग ठीक हो जाए तो फिजा रंगीन हो जाए (कम से कम प्राइम टाइम पर यही लगता है - यकीं नही होता तो श्रीमान रजत शर्मा का बुद्धिजीवी चैनल खोल लिया करो यार , पुरे एक घंटे me आपको ४ चुटकुले २ डांस ३ क्रिक्केट ५ शाहरुख़ की खबरे और ५ चड्डी के विज्ञापन देखने को मिल जायेंगे और हां एक-अध् न्यूज़ भी मिल जायेगी। रतको आपको डराने के बाद कोई खूखार बाबा आपका भविष्य भी बताएगा )। यार मई भी कहा कहा भटक जाता हु - मई तो चाँद के बहाने फिजा की चिंता कर रहा था । अब बेचारी क्या करेगी तभी 6 टी इन्द्री ने कहा अब फिजा फ़िल्म मे आएगी । फ़िल्म मे वो क्या करेगी यार उसके लिए हीरो कोन होगा ? जवाब भी हाजिर है हीरो के लिए अ क हंगल से बात चल रही है पर वो कहते है की यार हेरोइन (अभिनेत्री यार - तुम भी ग़लत मतलब निकाल लेते हो ) जीरो साइज़ की चाहिए। कोई एड एजेन्सी wala कह रहा था की अगर वो चाहे तो काले दंत manjan के एड का भी स्कोपे है...

वरुण गाँधी

हा तो यह तो होना ही था । जो छटपटाहट उनमे हो रही थी उसी का नतीजा है पीलीभीत मे उनका भाषण। हम अक्सर देखते आ रहे है की कोई तो बहुत मान पाताहै और कोई हाशिये पर ही रह जाता है। रामायण देखे तो तो पाएंगे की राम और लक्ष्मन का तो जिक्र हर जगह है पर शत्रुघ्न का बिल्कुल ही नही है । जो मान महाभारत मे युधिष्ठिर भीम और अर्जुन का है वो नकुल और सहदेव का नही है । कहने का मतलब यह है की वो हाशिये पर ही रहे। या तो दुर्योधन या दुशासन छाये रेह पर बाकि ९८ कोन है १०० मे से १०० भारतीय नही बता सकते (ऐसा मेरा मानना है )। ठीक इसी तरह राहुल और वरुण मे भी हाशिये की लडाई है। वरुण अच्छी तरह जानते है की वो कांग्रेस मे रहे तो हाशिये पर ही रहेंगे इसलिए उन्होंने बीजेपी चुनी । वो समाजवादी या रजद या बीएसपी भी चुन सकते थे लेकिन वो जानते है की इनकी अपील सिमित है । कल तक जो लोग वरुण को नही जानते थे वो भी जानने लगे है । ऐसा नही है की बीजेपी मे वरुण बहुत ऊपर तक जायेंगे लेकिन बीजेपी मे रहकर कम से कम वो हाशिये पर नही रहेंगे। वो ये भी जानते है की वो प्रधानमंत्री भी नही बन सकते क्योकि बीजेपी वाले ऐसा होने नही देंगे , कांग्रेस मे तो...

आओ जी

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हा तो मई कह रहा था की टीवी बकवास है पर मुझे कई कमेंट्स मिले है जिनमे सुझाया गया है की आप दूरदर्शन देखे या इंडिया टीवी तो बिल्कुल ही न देखे । अब जब टाटा स्काई लगवाया है तो हर महीने २५० रुपये ढीले करने ही है चाहे इसको देखो या नही देखो। कई बार ऐसा होता है की मे कई दिनों तक टूर पर होता हु और टीवी बंद ही रहता है फ़िर भी मुझे पैसा तो देना ही होता है । एक बात और है की हम जो चैनल देखना चाहता है वही हमें देखने को मिले अन्य चैनल जो हम नही चाहते वो न मिले। कई चैनल पैकेज मे ऐसे है जो मेरे किसी काम के नही है जैसे सन टीवी या सूर्य टीवी क्योकि मई तमिल या तेलुगु नही जानता। तब उन चैनल्स का भी पैसा मुझे देना होता है । तब एक मुद्दा उभर कर सामने आता है की अगर हम टीवी नही देख रहे है तो फ़िर भी पैसे क्यो दे रहे है । यह भी एक प्रीपेड सर्विस है सो जितना देखो उतना पैसा कटे । हा वलिदिटी वौचेर्स जरुर बनाए जा सकते है। इससे उपभोक्ताओ की जेब भी नही कटेगी और वो जितना चाहे उतना उपभोग करे .

पता नही

मैं रोज टीवी खोलता हु और रिमोट हाथ मे लेकर इत्मिनान से बैठना चाहता हु । पर आप विश्वास नही करेंगे की आधे घनटे मे पुरे ६५ चैनल बदलने के बाद थक हार कर टीवी बंद कर देता हु'। सिर्फ़ निराशा ही हाथ लगती है। पिछले दिनों इंडिया टीवी सामने आया और उसमे समाचारों के नाम पर दिखा रहे थे की सहवाग क्यो बैटिंग के दोरान आखे बंद करके बुदबुदाता है। क्या ये कोई मंत्र है ? तरह तरह के कयास लगाये जा रहे थे। ऊपर लाइन चल रही थी सहवाग का तदाताड़ मारक मात्र। पीछे से ॐ ॐ की आवाजे आ रही थी। पुरा माहोल बना हुआ था। एंकर आपस मे दिस्कुस्स कर रहे थे की सहवाग को कोई सिद्धि प्राप्त है क्या? शायद ये सिद्धि नेव्ज़ेअलन्द जाने के बाद प्राप्त हुई है। क्या ये वर्ल्ड कप तक चलेगी? मैंने अपना सर पकड़ लिया और टीवी बंद कर दिया । कुछ और देखने की इच्छा ही नही रही। हसी भी आ रही थी और क्षोभ भी हो रहा था। मैं सोच रहा था की ये क्या है? क्या ये कोई समाचार है, ज्योतिष है, विज्ञानं है, शास्त्र है, क्या है ये? इस बात को कई दिन गुजर गए पर मेरे आज तक समझ नही आया है। अगर आपको समझ aaye तो बताइए