आओ जी


हा तो मई कह रहा था की टीवी बकवास है पर मुझे कई कमेंट्स मिले है जिनमे सुझाया गया है की आप दूरदर्शन देखे या इंडिया टीवी तो बिल्कुल ही न देखे । अब जब टाटा स्काई लगवाया है तो हर महीने २५० रुपये ढीले करने ही है चाहे इसको देखो या नही देखो। कई बार ऐसा होता है की मे कई दिनों तक टूर पर होता हु और टीवी बंद ही रहता है फ़िर भी मुझे पैसा तो देना ही होता है ।

एक बात और है की हम जो चैनल देखना चाहता है वही हमें देखने को मिले अन्य चैनल जो हम नही चाहते वो न मिले। कई चैनल पैकेज मे ऐसे है जो मेरे किसी काम के नही है जैसे सन टीवी या सूर्य टीवी क्योकि मई तमिल या तेलुगु नही जानता। तब उन चैनल्स का भी पैसा मुझे देना होता है ।

तब एक मुद्दा उभर कर सामने आता है की अगर हम टीवी नही देख रहे है तो फ़िर भी पैसे क्यो दे रहे है । यह भी एक प्रीपेड सर्विस है सो जितना देखो उतना पैसा कटे । हा वलिदिटी वौचेर्स जरुर बनाए जा सकते है। इससे उपभोक्ताओ की जेब भी नही कटेगी और वो जितना चाहे उतना उपभोग करे .

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

चुनाव आचार संहिता - चू चू का मुरब्बा

जरनैल का जूता

पद्मश्री