क्या हुआ
चुनावी मोसम आ गया है और टीवी पर नए नए तेवर लेकर सारे दलोंके प्रवक्ता बाइट देते फ़िर रहे है। प्रकाश जावडेकर, रविशंकर प्रसाद और अभिषेक मनु संघवी कपिल सिब्बल। यदि दोनों दलों मे तुलना करे तो मुझे कांग्रेस के प्रवक्ता ज्यादा शार्प लगे। बीजेपी के प्रवक्ता मुझे लीपा पोती करते ज्यादा लगते है और मुद्दों का खोखलापण उभर कर सामने आ जाता है। इसके विरुद्ध अभिषेक और कपिल ज्यादा आक्रामक है। वो बीजेपी के प्रवक्ताओं को बगले झाकने पर मजबूर कर देते है
वैसे ये पहले ऐसे चुनाव है जहा मुद्दे गायब है और मनमोहन साहब का कथन सही हो सकता है की आडवाणी जी का प्रधानमंत्री बनने का सपना चूर चूर होने वाला है। खैर प्रधानमत्री ज्यादा संयमित है और उन्होंने संयम के साथ ही आडवाणी जी को लाल कर दिया और वो बहस की चुनोती देने लगे । पर आडवाणी जी भारत मे इन सब पचादो मे कोन पड़ता है। लोग तो बस ऐसे ही वोट दे देते है और वोट नही देने वाले ज्यादा राजनीती को कोसते है। ५ साल बाद कोन कहा होगा पता नही।
लालू ने उत्तेजना मे आकर कह दिया की आडवाणी अगर प्रधानमत्री बन गए तो वो चुनाव नही लडेंगे । लालूजी बडबोलापन ठीक नही है देखा नही दिग्गीराजा प्रतिज्ञा करके फस गए है । खैर ये तो ऐसा दरिया है जहा सभी अपना अपना लोटा लेकर बैठे हुए है .
वैसे ये पहले ऐसे चुनाव है जहा मुद्दे गायब है और मनमोहन साहब का कथन सही हो सकता है की आडवाणी जी का प्रधानमंत्री बनने का सपना चूर चूर होने वाला है। खैर प्रधानमत्री ज्यादा संयमित है और उन्होंने संयम के साथ ही आडवाणी जी को लाल कर दिया और वो बहस की चुनोती देने लगे । पर आडवाणी जी भारत मे इन सब पचादो मे कोन पड़ता है। लोग तो बस ऐसे ही वोट दे देते है और वोट नही देने वाले ज्यादा राजनीती को कोसते है। ५ साल बाद कोन कहा होगा पता नही।
लालू ने उत्तेजना मे आकर कह दिया की आडवाणी अगर प्रधानमत्री बन गए तो वो चुनाव नही लडेंगे । लालूजी बडबोलापन ठीक नही है देखा नही दिग्गीराजा प्रतिज्ञा करके फस गए है । खैर ये तो ऐसा दरिया है जहा सभी अपना अपना लोटा लेकर बैठे हुए है .
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