भस्मासुर

बचपन मे मेरी दादी मुझे कहानी सुनाया करती थी भस्मासुर की। किस तरह भस्मासुर ने तपस्या कर भगवन शंकर को प्रसन्न किया और वरदान माँगा की वो जिसके सर पर हाथ रख दे वह भस्म हो जाए। तथास्तु............और भस्मासुर एक्टिव हो गया। भस्मासुर अत्यन्त प्रसन्न और धीरे धीरे सब कुछ भस्म करता हुआ अपने रचयिता को ही भस्म करने को उद्यत हो गया। तब रचयिता भागते फायर और तीसरी ताकत की मदद से भस्मासुर को स्वयं अपने ही हाथो भस्म करवाने मे सफल रहे।
लगभग यही कहानी आज के वक्त पकिस्तान, अफगानिस्तान, अमेरिका, भारत और श्रीलंका मे जारी है। पहले तो आतंकवादी पैदा कर उनके हाथो अस्त्र शास्त्र दे दिए गए अब वे उन्ही से बचाव का रास्ता धुंद रहे है। लाहौर मे हमला, क्रिकेट पर हमला, पुलिस पर हमला, कश्मीर मे हमले, अफगानिस्तान मे रोजाना हत्याए.........ये सब क्या है।
पुराकाल मे राक्षस होते थे आजकल आतंकी है। हुकूमते लाचार है। अमेरिका की अधि शक्ति इनको सँभालने मे जाया हो रही है। पालनहार स्वयं परेशां है की अपने पित्ठुओ से अपने को कैसे बचाए। पाकिस्तान आतंकियों का नखलिस्तान हो गया है।
मेरा ३ वर्षीय बेटा जो मीठा खाने का शोकिन है । जब वह ज्यादा मीठा खा लेता है तब अपने कुल्हे खुजाते हुए मेरे पास आता है - पापा गुडी गुडी हो रही है। मे उसे खुजाता हु, मा उसके कुल्हे मे तेल लगाती है। उसे तात्कालिक रहत तो मिलती है पर समस्या जस की तस् रहती है। तब हमें उसे अल्बेन्दजोले या कोई अन्य कड़वी दवाई देनी पड़ती है ताकि कीडे निकल जाए। बिल्कुल यही हालत अमेरिका और पाक की हो रही है.उन्हें भी अगर कीडे निकलने है तो खुदको कड़वी दवाई खानी होगी।
हा तो मैंने शुरुआत भस्मासुर की कहानी से की थी। मेरी समझ से इन आतंकियों का इलाज भी भस्मासुर की पोरानिक कथा मे है। जैसे पालनहार को नारी रूप धरकर भस्मासुर को नचाकर उसका हाथ स्वयं के सर पर धरने के लिए बाध्य किया था ताकि वह ख़ुद भस्म हो जाए। वैसे ही इन आधुनिक भस्मासुरों को उन्ही के हाथो ख़त्म करना होगा.
लगभग यही कहानी आज के वक्त पकिस्तान, अफगानिस्तान, अमेरिका, भारत और श्रीलंका मे जारी है। पहले तो आतंकवादी पैदा कर उनके हाथो अस्त्र शास्त्र दे दिए गए अब वे उन्ही से बचाव का रास्ता धुंद रहे है। लाहौर मे हमला, क्रिकेट पर हमला, पुलिस पर हमला, कश्मीर मे हमले, अफगानिस्तान मे रोजाना हत्याए.........ये सब क्या है।
पुराकाल मे राक्षस होते थे आजकल आतंकी है। हुकूमते लाचार है। अमेरिका की अधि शक्ति इनको सँभालने मे जाया हो रही है। पालनहार स्वयं परेशां है की अपने पित्ठुओ से अपने को कैसे बचाए। पाकिस्तान आतंकियों का नखलिस्तान हो गया है।
मेरा ३ वर्षीय बेटा जो मीठा खाने का शोकिन है । जब वह ज्यादा मीठा खा लेता है तब अपने कुल्हे खुजाते हुए मेरे पास आता है - पापा गुडी गुडी हो रही है। मे उसे खुजाता हु, मा उसके कुल्हे मे तेल लगाती है। उसे तात्कालिक रहत तो मिलती है पर समस्या जस की तस् रहती है। तब हमें उसे अल्बेन्दजोले या कोई अन्य कड़वी दवाई देनी पड़ती है ताकि कीडे निकल जाए। बिल्कुल यही हालत अमेरिका और पाक की हो रही है.उन्हें भी अगर कीडे निकलने है तो खुदको कड़वी दवाई खानी होगी।
हा तो मैंने शुरुआत भस्मासुर की कहानी से की थी। मेरी समझ से इन आतंकियों का इलाज भी भस्मासुर की पोरानिक कथा मे है। जैसे पालनहार को नारी रूप धरकर भस्मासुर को नचाकर उसका हाथ स्वयं के सर पर धरने के लिए बाध्य किया था ताकि वह ख़ुद भस्म हो जाए। वैसे ही इन आधुनिक भस्मासुरों को उन्ही के हाथो ख़त्म करना होगा.
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