घी का मायाजाल
मुनाफा कमाने के लिए लोग इस हद तक गिर जाते है कि वे दूसरों की जिंदगी ही दांव पर लगा देते है। ऐसे लोगों को केवल पैसों की भूख होती है। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले ऐसे लोगों को फांसी की सजा मुकर्रर होनी चाहिए। यह कहना है घी बनाने वाली एक फैक्टरी में काम करने वाले युवक का।
पंचकूला निवासी इस युवक को जब घी की असलियत पता लगी तो उसने फैक्टरी ही छोड़ दी। यह युवक घी की सुगंध से ही बता देता है कि यह असली है या नकली। युवक का दावा है कि पंचकूला में भी कई जगहों पर नकली घी बिक रहा है।
कैसे तैयार होता है नकली घी
देशी घी के नाम पर जो नकली घी बाजार में उपलब्ध है, उसमें हड्िडयों का बुरादा मिला होता है। मिली जानकारी के अनुसार शुद्ध घी में हड्डी की चर्बी लगभग बराबर अनुपात में मिलाई जाती है, जिससे वह दानेदार प्रतीत होता है। हड्डी की बदबू खत्म करने के लिए इसमें केमिकल एसेंस डाला जाता है। हड्डी का जो बुरादा डाला जाता है, उसे टेलो कहते है। इसीलिए इस घी के निर्माताओं ने इसे कोड वर्ड 'टेलो घी' का नाम दे रखा है।
खास बात यह है कि आम आदमी को इस घी के नकली होने का जरा सा इल्म नहीं हो सकता। टेलो को साबुन बनाने में भी प्रयोग किया जाता है। टेलो को कई घी निर्माता लकड़ी के बुरादे के साथ मिक्स करके बड़े कड़ाई में पकाते है, जिससे यह नीचे नहीं बैठता। देसी घी की मात्रा इस नकली घी में 30 से 40 प्रतिशत ही होती है। इससे सुगंध व लेबोरेट्री टेस्ट सेम आते है।
देशभर में बिछा है जाल
नकली घी बनाने वालों का पूरे देश में जाल बिछा है। खास बात यह है कि ये लोग एक-दूसरे से माल ठिकाने लगाने अथवा कच्चे माल की सप्लाई के बारे में कोड वर्ड में बात करते रहते है। एक मोटे अनुमान के अनुसार करीब 250 कंपनियां इस तरह का घी बना रही है। इन कंपनियों का वार्षिक टर्नओवर करीब 1200 करोड़ रुपयों का है।
सेहत के लिए खतरनाक
हड्डी के बुरादे व केमिकल एसेंस से बना यह नकली घी सेहत के लिए अत्यंत घातक है। डा. एके गोयल बताते है कि इस घी के सेवन से गुर्दे खराब हो सकते है। यही नहीं, इस घी का असर दिल पर भी पड़ता है। खासकर बच्चों के लिए यह घी बहुत ही खतरनाक है।
नकल नामी कंपनियों की
सूत्रों के अनुसार नकली घी बनाने वाली कंपनियां नामी कंपनियों की नकल कर रही है। यानि मशहूर कंपनियों के ब्रांडों से मिलते-जुलते रैपर व मिलते-जुलते नामों से ये कंपनियां अपना प्रोडक्ट बाजार में बेच रही है।
आम लोग होते है शिकार
नकली घी बनाने वालों के निशाने पर गरीब व आम लोग है। देहाती लोग जो कम पढ़े-लिखे है, वे भी इनके निशाने पर है। यही कारण है कि अधिकतर गांवों में इस नकली घी का व्यापार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।
कैसे करें पहचान
देशी शुद्ध घी व टेलो घी में अंतर करना बेहद आसान है। देशी घी गर्म करने पर पूरी तरह पारदर्शी बन जाता है। जबकि टेलो घी गर्म करने पर पारदर्शी नहीं होता। इसमें शामिल हड्िडयों का बुरादा घी को पारदर्शी नहीं होने देता।
पंचकूला निवासी इस युवक को जब घी की असलियत पता लगी तो उसने फैक्टरी ही छोड़ दी। यह युवक घी की सुगंध से ही बता देता है कि यह असली है या नकली। युवक का दावा है कि पंचकूला में भी कई जगहों पर नकली घी बिक रहा है।
कैसे तैयार होता है नकली घी
देशी घी के नाम पर जो नकली घी बाजार में उपलब्ध है, उसमें हड्िडयों का बुरादा मिला होता है। मिली जानकारी के अनुसार शुद्ध घी में हड्डी की चर्बी लगभग बराबर अनुपात में मिलाई जाती है, जिससे वह दानेदार प्रतीत होता है। हड्डी की बदबू खत्म करने के लिए इसमें केमिकल एसेंस डाला जाता है। हड्डी का जो बुरादा डाला जाता है, उसे टेलो कहते है। इसीलिए इस घी के निर्माताओं ने इसे कोड वर्ड 'टेलो घी' का नाम दे रखा है।
खास बात यह है कि आम आदमी को इस घी के नकली होने का जरा सा इल्म नहीं हो सकता। टेलो को साबुन बनाने में भी प्रयोग किया जाता है। टेलो को कई घी निर्माता लकड़ी के बुरादे के साथ मिक्स करके बड़े कड़ाई में पकाते है, जिससे यह नीचे नहीं बैठता। देसी घी की मात्रा इस नकली घी में 30 से 40 प्रतिशत ही होती है। इससे सुगंध व लेबोरेट्री टेस्ट सेम आते है।
देशभर में बिछा है जाल
नकली घी बनाने वालों का पूरे देश में जाल बिछा है। खास बात यह है कि ये लोग एक-दूसरे से माल ठिकाने लगाने अथवा कच्चे माल की सप्लाई के बारे में कोड वर्ड में बात करते रहते है। एक मोटे अनुमान के अनुसार करीब 250 कंपनियां इस तरह का घी बना रही है। इन कंपनियों का वार्षिक टर्नओवर करीब 1200 करोड़ रुपयों का है।
सेहत के लिए खतरनाक
हड्डी के बुरादे व केमिकल एसेंस से बना यह नकली घी सेहत के लिए अत्यंत घातक है। डा. एके गोयल बताते है कि इस घी के सेवन से गुर्दे खराब हो सकते है। यही नहीं, इस घी का असर दिल पर भी पड़ता है। खासकर बच्चों के लिए यह घी बहुत ही खतरनाक है।
नकल नामी कंपनियों की
सूत्रों के अनुसार नकली घी बनाने वाली कंपनियां नामी कंपनियों की नकल कर रही है। यानि मशहूर कंपनियों के ब्रांडों से मिलते-जुलते रैपर व मिलते-जुलते नामों से ये कंपनियां अपना प्रोडक्ट बाजार में बेच रही है।
आम लोग होते है शिकार
नकली घी बनाने वालों के निशाने पर गरीब व आम लोग है। देहाती लोग जो कम पढ़े-लिखे है, वे भी इनके निशाने पर है। यही कारण है कि अधिकतर गांवों में इस नकली घी का व्यापार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।
कैसे करें पहचान
देशी शुद्ध घी व टेलो घी में अंतर करना बेहद आसान है। देशी घी गर्म करने पर पूरी तरह पारदर्शी बन जाता है। जबकि टेलो घी गर्म करने पर पारदर्शी नहीं होता। इसमें शामिल हड्िडयों का बुरादा घी को पारदर्शी नहीं होने देता।
'ghee ka mayajal' is an eye-opener, but i wonder how many eye-openers we need to keep our eyes open. such mayajals r everywhere - milk-supply, life-saving druggs, vegetables, fruits, drinking water, babyfood, n what not! public awareness is one way to avoid such traps, n u r doing the right job, dear vishal. Kudos to you!
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