चुनाव आचार संहिता - चू चू का मुरब्बा
चुनावी मोसम आ आया और चुनावी मेंढक आपने अपने बिलों से बहार आ गए। कल तक जो नेता सूरत दिखाने ५ सालो मे आते थे अब वो इस चुनावी बहार मे गुलजार हो रहे है। जहा देखो ये ही नजर आ रहे है।
पहले तो चुनाव आयोग क्या होता है ये लोग नही जानते थे परन्तु श्रीमान शेषन के पदार्पण के बाद सभी जानने लगे है। उनकी लीक पीटने का काम उनके बाद के चुनाव आयुक्त कर रहे है। परन्तु ये चुनाव अचार संहिता अब लगने लगा है की चुचू का मुरब्बा बन कर रह गई है। जहा देखो यही शोर है की फलाने जी को आदर्श चुनाव संहिता या अचार संहिता का उल्लंघन करने पर नोटिस दिया या आपत्ति जताई परन्तु होता कुछ नही । इस बार यह देखने मे आ रहा है की बीजेपी के नेताओ पर ज्यादा अचार संहिता के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे है। इससे दो निष्कर्ष निकलते है या तो वास्तव मे बीजेपी के लोग कानून नही मानते या उन्हें जबरदस्ती बलि का बकरा बनाया जा रहा है। दुसरे मामलो का तो नही कह सकता पर जसवंत सिंह वाले मामले मे लगता है की अचार संहिता चुचू का मुरब्बा हो रही है।
बड़ा रोचक मामला है जसवंत सिंह को ढोल वाले को पैसे देने के आरोप मे नोटिस। इस मामले की जांच चुनाव आयोग के आदेश पर जिलाधिष ने की और उन्हें ढोल वाले को पैसे देने का दोषी पाया. भइया ढोल वाले को पैसे नही देंगे तो क्या चुनाव आयोग सभी प्रत्याशीयो को ढोल उपलब्ध कराएगा।
पहले तो चुनाव आयोग क्या होता है ये लोग नही जानते थे परन्तु श्रीमान शेषन के पदार्पण के बाद सभी जानने लगे है। उनकी लीक पीटने का काम उनके बाद के चुनाव आयुक्त कर रहे है। परन्तु ये चुनाव अचार संहिता अब लगने लगा है की चुचू का मुरब्बा बन कर रह गई है। जहा देखो यही शोर है की फलाने जी को आदर्श चुनाव संहिता या अचार संहिता का उल्लंघन करने पर नोटिस दिया या आपत्ति जताई परन्तु होता कुछ नही । इस बार यह देखने मे आ रहा है की बीजेपी के नेताओ पर ज्यादा अचार संहिता के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे है। इससे दो निष्कर्ष निकलते है या तो वास्तव मे बीजेपी के लोग कानून नही मानते या उन्हें जबरदस्ती बलि का बकरा बनाया जा रहा है। दुसरे मामलो का तो नही कह सकता पर जसवंत सिंह वाले मामले मे लगता है की अचार संहिता चुचू का मुरब्बा हो रही है।
बड़ा रोचक मामला है जसवंत सिंह को ढोल वाले को पैसे देने के आरोप मे नोटिस। इस मामले की जांच चुनाव आयोग के आदेश पर जिलाधिष ने की और उन्हें ढोल वाले को पैसे देने का दोषी पाया. भइया ढोल वाले को पैसे नही देंगे तो क्या चुनाव आयोग सभी प्रत्याशीयो को ढोल उपलब्ध कराएगा।
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