जरनैल का जूता

इतिहास गवाह है जब जब जुल्म की इन्तहा होती है तो दबा हुआ गुस्सा बाहर फ़ुट आता है ऐसा ही कुछ दिल्ली मे हुआ जब बहादुर पत्रकार जरनैल सिंह ने चिदंबरम पर जुटा उछालफेका यहाँ जो जूता ताईटलर पर पड़ना था उसे सांकेतिक रूप से गृहमंत्री पर मारा गयायह हमला देश के maanas पर भी है जिसने कम से कम soye हुए लोगो को jhinjhoda तो सही यह कोई हमला नही आक्रोश की अभिव्यक्ति था


८४ के दंगो के शिकार अब तक न्याय को तरस रहे है और दंगाई सजा पाने के बजाय मत्री बन रहे है ये कैसा न्याय है राजीव गाँधी ने कहा था की जब बड़ा पेड़ गिरता है तो निचे वाले दबेंगे ही ( यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है की राजीव ने यह बात गुजरात के २० वर्ष पहले कही थी, यानि की हम कह सकते है की मोदी परम्पराओ का पालन कर रहे थे?)


BJP ने moka lapak लिया और sikho ने जरनैल को moral support दिया अब घटना की शव parikshaa हो रही है और हो सकता है congress जरनैल के BJP के साथ रिश्ते talaashe इस swabhavik घटना को purvniyojit बताये


chidambram ने बड़ा अच्छा किया जो जरनैल को maaf कर दिया इससे उनका कद ही badhega congress इस घटना की निंदा कर रही है पर उसे samajhna होगा की जब तक ८४ के दंगो के aaropiyo को saja नही मिलती tab तक andarooni आक्रोश jagrut रहेगा अब congress को jagdish तैत्लर और सज्जन kumar के tikat काटने होंगे और sikho से mafi maangni chhahiye


खैर जरनैल badhaai के patr है की उन्होंने देश को jhinjhoda है bhale ही उसके लिए unhe जूता fekna पड़ा हो

टिप्पणियाँ

  1. bahut sahi kaha hai aapane.
    achchhe sawal aapaki aur se aaye hain.
    achchha blog hai aapaka.
    abhi dewas me hi hoon.
    aap dewas se bahar bhi achchhe hi honge.
    badhai achchhe blog ke liye.

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  2. boss, as now advani has also got the sleeper on his face, this is the time to rethink about the whole indian politics rather than criticising only one party. this is a return back from common people to our political system and self centered and greedy politicians. we should vote and try to bring accountable person on front.

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