जूता पुराण
मेरे अपने पहले ब्लॉग जरनैल का जूता मे जरनैल सिंह के जूता फेकने को सही ठहराया था और मई उस पर अभी भी कायम हु। मैंने जो कहा था वह सच हुआ और कांग्रेस ने सज्जन और जगदीश के टिकेट भी काटे परन्तु अब तो जुटा फेकने की बयार आई हुई है। जिसे देखो वही जूता फेक रहा है। जीतेन्द्र, आडवानी, नविन जिंदल और अब प्रधानमन्त्री पात्र जूता फेका जा चुका है।
जरनैल के जूता फेकने और बाकि जूता फेकने मे अन्तर है। जरनैल के पास मुद्दा था लेकिन बाकि सिर्फ़ सुर्खिया बटोरने के लिए ये सब कर रहे है। प्रधानमत्री पर जूता फेकना असभ्यता की पराकाष्ठा है। इन लोगो को माफ़ करना इनके होसले बढ़ाने जैसा ही है।
प्रधानमंत्री का पद बहुत ही गंभीर और जिमेदार पदहै, इस पड़ पर आसीन व्यक्ति बहुत ही सम्माननीय होते है उनपर जूता फेकना बहुत ही ग़लत और कायराना हरकत है। अब सरकार को सभी जूते फेकने वालो पर कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि संदेश मिले की झूटे प्रचार पाने का यह तरीका कितना ग़लत है।
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