वरुण गाँधी

हा तो यह तो होना ही था । जो छटपटाहट उनमे हो रही थी उसी का नतीजा है पीलीभीत मे उनका भाषण। हम अक्सर देखते आ रहे है की कोई तो बहुत मान पाताहै और कोई हाशिये पर ही रह जाता है। रामायण देखे तो तो पाएंगे की राम और लक्ष्मन का तो जिक्र हर जगह है पर शत्रुघ्न का बिल्कुल ही नही है । जो मान महाभारत मे युधिष्ठिर भीम और अर्जुन का है वो नकुल और सहदेव का नही है । कहने का मतलब यह है की वो हाशिये पर ही रहे। या तो दुर्योधन या दुशासन छाये रेह पर बाकि ९८ कोन है १०० मे से १०० भारतीय नही बता सकते (ऐसा मेरा मानना है )।
ठीक इसी तरह राहुल और वरुण मे भी हाशिये की लडाई है। वरुण अच्छी तरह जानते है की वो कांग्रेस मे रहे तो हाशिये पर ही रहेंगे इसलिए उन्होंने बीजेपी चुनी । वो समाजवादी या रजद या बीएसपी भी चुन सकते थे लेकिन वो जानते है की इनकी अपील सिमित है । कल तक जो लोग वरुण को नही जानते थे वो भी जानने लगे है । ऐसा नही है की बीजेपी मे वरुण बहुत ऊपर तक जायेंगे लेकिन बीजेपी मे रहकर कम से कम वो हाशिये पर नही रहेंगे। वो ये भी जानते है की वो प्रधानमंत्री भी नही बन सकते क्योकि बीजेपी वाले ऐसा होने नही देंगे , कांग्रेस मे तो खैर गाँधी और भी है ।
अपने वजूद की तलाश मे वरुण की छटपटाहट ने उनसे भाषण दिलाया और मई ऐसा मानता हु की अगर वरुण का नार्को कराया जाए तो उसमे धर्मनिरपेक्षता ही निकलेगी । गोविन्दाचार्य ने कहा था की वाजपेयी बीजेपी का मुखोटा है वैसे ही मेरा भी यह मानना है की ये भाषण वरुण का मुखोटा है । अभी वरुण को काफी ऊपर तक जाना है और सीडी चड़ने के लिए ये तरीका चोखा है ।
अब ये है की आगे क्या : दो नतीजे है पहला ये की वरुण चुनाव जीत जायेंगे और दूसरा की वो हार जायेंगे । जीतेंगे तो जीत है ही और हारे तो राज्यसभा मे जाने से कोन रोकता है । मतलब उन्हें जो पाना है वो पा लेंगे । इस भाषण से पहले भी वो जीतते क्योकि हमारी जड़ो मे अभी भी (पीलीभीत या रायबरेली या अमेठी के मतदाता ) कृतज्ञता है सो हम उन्हें जिताते ।

अब यहाँ दो मुद्दे उभर कर आते है की वरुण ने वो भाषण मुट्ठी भर आदमियों के सामने दिया था जिसको मीडिया ने पुरे देश तक पंहुचा दिया और उनको मोका दे दिया जिसको उन्होंने लपक लिया । अब आज उनकी गिरफ्तारी का ल;इव दिखा कर उनका कद बढ़ा दिया मतलब अगर वो चुनाव हर रहे होते तो भी जीतेंगे अब देखते है की आगे क्या होता है पर जो कुय्छ हो रहा है वो चिंताजनक है और देश को एक और मोदी मिलने जा रहा है .

टिप्पणियाँ

  1. विडम्बना है राजनीति की भी! स्वागत ब्लॉग परिवार में.

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  2. सादर अभिवादन
    सबसे पहले तो आपकी रचना के लिए ढेरो बधाई
    ब्लोग्स के नए साथियो में आपका बहुत बहुत स्वागत

    चलिए एक मुक्तक से अपना परिचय करा रहा हूँ

    चले हैं इस तिमिर को हम , करारी मात देने को
    जहां बारिश नही होती , वहां बरसात देने को
    हमे पूरी तरह अपना , उठाकर हाथ बतलाओ
    यहां पर कौन राजी है , हमारा साथ देने को

    सादर
    डा उदय ’मणि’ कौशिक
    http://mainsamayhun.blogspot.com

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